खर पतवार नहीं बात नाशक हर निर्गुन्डी

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हमारे आस पास कई औषधि पौधे बिखरे पड़े हैं ,कोई पहाड़ पर तो कोई नदियों,मैदानों पर तो कुछ फसलों में खरपतवार के रूप में,,लेकिन शायद पहचान और जानकारी न होने के कारण हम उनके गुणों से अनजान होते हैं ..ऐसा ही एक औषधि पौधा है जिसे “निर्गुन्डी ” कहते हैं…जो शरीर क़ी रोगों से रक्षा करे वह निर्गुन्डी होती है” …इसे वात से सम्बंधित बीमारियों में रामबाण औषधि माना गया है ,,छह से बारह फुट उंचा इसका पौधा,झाड़ीनुमा सूक्ष्म रोमों से ढका रहता है ,पत्तियों क़ी एक ख़ास पहचान किनारों से क़ी जा सकती है,इसके फल छोटे और गोल होते हैं…. कुछ दिनों पहले माही नदी के तट पर जाना हुआ जहाँ यह पौधा हजारो की संख्या मिला,,वहाँ आदिवासी लोग इसे नैगड़ कहते हैं… उनके अनुसार चोट लगने या सूजन होने पर इसकी पत्तियों को कूटकर बांधा जाता है…वही बच्चो के गले मे इसकी जड़ को भी बांधते हैं ताकि दांत जल्दी निकल आये…।


निर्गुन्डी को संभालू/सम्मालू, शिवारी, निसिन्दा शेफाली,गुजरात मे नेगड़ संस्कृत में इंद्राणी,नीलपुष्पा,सिन्दुवार आदि नामो से जाना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार यह कफवातशामक औषधि के रूप में जानी जाती है ,जिसे श्रेष्ठ वेदनास्थापन अर्थात दर्द को कम करने वाला माना गया है… यह घाव को विसंक्रमित करनेवाला ,भरनेवाले गुणों से युक्त होता है…


इसकी पत्तियों का काढा बनाकर कुल्ला करने मात्र से गले का दर्द जाता रहता है वही
कटे-फ़टे होठ पर केवल इसके तेल को लगाने से लाभ मिल जाता है… I
#साइटिका ओर #स्पेनडिक्स रोग में निर्गुन्डी रामबाण इलाज है..।
अनेक रोगों में ईसकी पत्तियाँ,छाल, जड़े, बीज और तेल बहुत ही लाभकारी सिद्ध होते हैं..।

निर्गुन्डी से जुड़ी कोई जानकारी हो तो अवश्य शेयर करे…।
नंदकिशोर प्रजापति कनावन

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