दलित राजनीति की चुनौती, सिर्फ समस्या ही समस्या, समधान पर चर्चा नहीं

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भारत की जनसँख्या का वह भाग जो अपनी गिनती Scheduled Caste सूची (मैं दलित और शूद्र के विवाद में नहीं पड़ना चाहता) में करता है या अपने आप को इस सूची में पाता है, वह कैसे 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के 68 वर्ष बाद भी अपने आप को शोषित पाता है ?

विश्व के शायद ही किसी अन्य देश में इतना सक्षम और सशक्त positive discrimination या सकारात्मक भेदभाव होता हो. इसके बावजूद, अगर इस वर्ग के कुछ नेता यह महसूस करते है कि इस वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है, तो उन्हें यह बतलाना चाहिए कि उस अन्याय को कैसे समाप्त किया जा सकता है.

जबकि इन 68 वर्षो में से लगभग 58 वर्ष उन पार्टियों ने भारत में शासन किया जो अपने आप को तथाकथित रूप से Scheduled Caste वर्ग का हितैषी मानते है और उनके वोट पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार थे?
चूंकि संविधान लागू होने के समय इस वर्ग की जनसँख्या 15 प्रतिशत थी (लन 2011 की जनगणना के हिसाब से 16.6 प्रतिशत), संविधान में इस वर्ग को शिक्षा, नौकरी, चुनाव में 15 प्रतिशत आरक्षण दिया गया.
इसके अलावा, भारतीय संविधान ने ‘अस्पृश्यता’ को समाप्त कर दिया है.

अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में इस वर्ग के खिलाफ अत्याचारों को रोकने के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है. विश्व के शायद ही किसी अन्य देश में इतना सक्षम और सशक्त positive discrimination या सकारात्मक भेदभाव होता हो. इसके बावजूद, अगर इस वर्ग के कुछ नेता यह महसूस करते है कि इस वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है, तो उन्हें यह बतलाना चाहिए कि उस अन्याय को कैसे समाप्त किया जा सकता है.


इस वर्ग के नेता कुछ मार-पीट और अत्याचार का उदहारण देंगे. ऐसी मार-पीट और अत्याचार दुर्भाग्यपूर्ण है. लेकिन क्या क्या यह केवल इसी वर्ग को झेलनी पड़ती है? क्या समाज के अन्य वर्ग को कोई प्रताड़ना नहीं झेलनी पड़ती है?
और उन अपराधों के लिए कौन जिम्मेवार है जब Scheduled Caste और पिछड़े वर्ग के दबंग लोग Scheduled Caste वर्ग के निर्धन लोगो पे अत्याचार करते है? जैसा कि अभी बागपत में Scheduled Caste वर्ग के लोगो ने Scheduled Caste महिला के साथ बलात्कार किया क्योकि उस महिला का Scheduled Caste पुत्र पहले वाले Scheduled Caste वर्ग की लड़की को तथाकथित रूप से भगा ले गया था?

ऐसा कहा जाता है कि Scheduled Caste के पास खेती की जमीन नहीं है. अतः वे खेती पे गुजारा नहीं कर सकते. लेकिन उन के पास अपनी जनसँख्या के प्रतिशत के अनुरूप शिक्षा और नौकरी का आश्वासन तो है.


ऐसा कहा जाता है कि Scheduled Caste के पास खेती की जमीन नहीं है. अतः वे खेती पे गुजारा नहीं कर सकते. लेकिन उन के पास अपनी जनसँख्या के प्रतिशत के अनुरूप शिक्षा और नौकरी का आश्वासन तो है.
इसके विपरीत, गुर्जर, जाट, पटेल के पास भूमि और खेती तो है, लेकिन उस कृषि से ना तो लाभ का, ना ही शिक्षा और ना ही नौकरी का आश्वासन है.
कही ऐसा तो नहीं है क़ि Scheduled Caste के अभिजात लोगो ने ही इस वर्ग के गरीब लोगो के अधिकारों पे कब्ज़ा कर लिया और उन गरीबो को अन्याय और लॉलीपॉप के नाम पे बहलाते और भड़काते रहते है, जिससे उनकी धूर्तता सामने ना आये ?

अमित सिंघल

न्यूयॉर्क

 

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