मिलिये बहन सुजैन ब्रांट जी से,एक फिल्ममेकर, पत्रकारिता से लेकर एक योग शिक्षिका तक का सफर

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अमेरिका के न्यूयार्क शहर में योग करने से होने वाले लाभ के बारे में लोगों को जागरूक करना योग के प्रति इनकी दृढ़ आस्था का परिचय देती है। जीवन में संघर्षों, चिन्ताअों में जब अवसाद का दौर था और राह बोझिल-सी धुँधली होने लगी तभी योग एक नई रोशनी लेकर आया। सुजैन जी के अनुसार सिर्फ चंद दिनों पहले ही तो मेरी बहन ने जिंदगी खुशी से जीने की बात कही थी…! पर माँ को टर्मिनल ब्रेस्ट कैंसर होने की खबर ने हम सभी को बुरी तरह से अंदर तक हिला दिया था। हम दोनों बहनें माँ के साथ ही अपना सारा समय बिताने लगेे। मगर होनी को किसने रोका है…माँ हम सभी से अब सदा के लिए दूर चली गई थी…!!! अब मेरे मन में जिंदगी, सच्ची खुशी, जीवन का उद्देश्य,प्रेम, शांति एवं सुकून से संबंधित कई अनसुलझे प्रश्न आने लगे। इन्हीं प्रश्नों के जवाब जानने मैं भारत आई। लगभग 22 घंटों की यात्रा….यहाँ पहुँचने पर मेरी मुलाकात सबसे पहले एक योग गुरू से हुई। मुझे अपने सारे प्रश्नों का एक ही उत्तर मिला….कि आपकी सारी समस्यायें आप खुद ही हल कर सकते हैं , कोई अौर नहीं। बस मार्गदर्शन सही होना चाहिए। मेरी दूसरी मुलाकात एक ऎसे बच्चे से हुई जिसके पास गायें थीं। उन गायों को देखकर ऎसा लग रहा था मानों सभी साथ में स्वीमिंग कर रहे हों!!! बच्चे के साथ मेरी खूब पटी। हमने साथ में बहुत जोक्स मारे। करीब ही एक मंदिर में मैंने कुछ लोगों से आध्यात्म पर बातें की। अपनी आँखों को कुछ समय बंद कर ध्यान करते हुए ऐसा लगा जैसे मै अँधेरेपन को चीरते हुए किसी तेज चमकते हुए प्रकाशपुंज में पहुँच गई हूँ। मन बिल्कुल शांत-सा….कहीं कोई कोलाहल नहीं…एक ऎसी वास्तविकता जिसका आधार ही लोगों को आपस में जोड़ना है। ऎसा तभी संभव है जब हम सभी अपने-अपने ऎंकर अर्थात् अपने गुरू का चुनाव आज ही कर लें ताकि सही मार्गदर्शन हो सके। सधन्यवाद आप सभी काे! ॐ गुरूवे नम: ॥🙏

अलानिस मोरिसेते ने अमेरिका के प्रसिद्ध ओपरा विनफ्रे शो के साथ हुए एक खास ऎपिसोड के साक्षात्कार में 1997 की अपनी भारत यात्रा को ‘दिव्य’ बताया है। अपनी ‘आनंदपूर्ण एक माह’ की भारत-यात्रा को मोरिसेते ने प्रकृति और हिमालय की गोद में बखूबी अनुभव किया है। अपने अन्दर हुए इस ‘आध्यात्मिक जागरण’ से जागृत होना , अपने ‘स्वयं की खोज’ से परिचय होना, बाहरी शोर-शराबे से दूर योग एवं ध्यान ने उनके चित्त को अलौकिक शांति प्रदान की है। हर थोडी़- थोड़ी दूर पर भारत के बदलते परिदृश्य हृदय एवं मन को जोश और ऊर्जावान् जिंदगी जीने का गुर सिखा जाते हैं। पूर्णतः सफल एवं सार्थक जीने और मानसिक उधेड़बुन से मुक्ति योग एवं आध्यात्मिक गुरूआें के देश अर्थात् विश्वगुरू भारत में ही संभव है….अतुलनीय भारत!

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