जानिए जैतून के बारे में

जैतून के नाम से बहुत कम लोग परिचित है,,प्रीमियर खाद्य तेलों कि श्रेणी में जैतून तेल का स्थान सबसे ऊँचा होता है …।
दुनिया भर में जैतून तेल व फल कि बढ़ती मांग से इसके पेड़ उगाना फायदे मंद साबित हो रहा है जैतून तेल का उपयोग खाने के साथ ,सौन्दर्य प्रसाधन व दवाइयों में हो रहा है वहीँ जैतून के फल से दुनिया भर के सभी नामी होटल में कई तरह के व्यंजन बनाए जाते है …….. राजस्थान में जैतून कि खेती के लिए सरकार के स्तर पर भी प्रोजेक्ट चलाए गए है इनकी सफलता को देखते हुए अब किसानों को इसकी खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है राजस्थान के अलावा दुसरे प्रांतों में भी जैतून कि खेती कि काफी संभावनाएं है…….


देश में इन किस्मों के पौधे को #इस्रायल से मंगाकर नर्सरी में तैयार किया जाता है विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्यतया जैतून का पेड़ विकसित होने के बाद ३ वर्ष में फुल देना शुरू कर देता है लेकिन वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर दो वर्ष बाद भी फुल आना शुरू हो जाते है फुल आने के बाद जैतून के पौधों में फल लगना शुरू हो जाता है।
राजस्थान के जयपुर , झुंझुनू , बीकानेर , श्रीगंगानगर , नागौर , जालौर व अलवर में इसकी खेती हो रही है….वहीँ 2014 में बीकानेर के लूणकरणसर क्षेत्र में इसकी प्रथम जैतून तेल रिफाइनरी भी स्थापित की गई है…

#औषधीय_गुण
जैतून के कच्चे फलों को जलाकर,उसकी राख में शहद मिलाकर,सिर में लगाने से सिर की गंज तथा फुंसियों में लाभ होता है ……..पांच मिली जैतून पत्र स्वरस को गुनगुना करके उसमें शहद मिलाकर १-२ बूँद कान में डालने से कान के दर्द में आराम होता है ……..जैतून के कच्चे फलों को पानी में पकाकर उसका काढ़ा बना लें …..इस काढ़े से गरारा करने पर #दांतों तथा मसूड़ों के रोग मिटते हैं तथा इससे मुँह के छाले भी ख़त्म होते हैं ……जैतून के तेल को छाती पर मलने से सर्दी,खांसी तथा अन्य कब्ज विकारों का शमन होता है …….जैतून के तेल की मालिश से आमवात,वातरक्त तथा जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है …… जैतून के पत्तों के चूर्ण में शहद मिलाकर घावों पर लगाने से #घाव जल्दी भरते हैं …… जैतून के कच्चे फलों को पीसकर लगाने से चेचक तथा दुसरे फोड़े फुंसियों के निशान मिटते हैं……अगर शरीर का कोई भाग अग्नि से जल गया हो तो यह लेप लगाने से छाला नहीं पड़ता ….. जैतून के पत्तों को पीसकर लेप करने से पित्ती,खुजली और #दाद में लाभ होता है ….. जैतून के तेल को चेहरे पर लगाने से रंग निखरता है तथा सुंदरता बढ़ती है ।
नंदकिशोर प्रजापति कानवन

जानिए कितना गुणकारी है ज्वार

भारत के पारम्परिक अनाजो में ज्वार का महत्वपूर्ण स्थान है…. हमारी कई पीढ़ियों को ऊर्जा देने का काम ज्वार ने किया है, पर अब तो हम इसे भूल से गये है… ज्वार को जोन्ना, ज्वारी,जोल आदि नामों से जाना जाता है… आज भी यह अनाज विश्व मे पांचवा स्थान रखता है,वही भारत मे तृतीय स्थान है…एक समय था कि ज्वार की रोटी के साथ ,ज्वार की राबड़ी,ज्वार के फुल्ले, आदि का सेवन बड़े चाव से किया जाता था पर अबतो कई जगह देखने को तक नही मिलती…..हमारे मालवा में जब #शादी होती है तो ज्वार के चारे से मंडप को ढका जाता रहा है पर अब यह बहुत कम मिलती है तो लोग बिना इसके ही मंडप कर लेते है…!!अब तो ज्वार की नये नये शंकर बीजो से पशुओ के लिए चारा वाली ज्वार बोते है,, जो कभी कभी पशुओ की जान तक ले लेती हैं..। आज ज्वार के योग से अनेक प्रकार की #शराब भी बनाई जाती है वही #बॉयोडीजल में प्रयोग रतनजोत की जगह अब ज्वार की उपयोगिता ऊर्जा के इस क्षेत्र में बढ़ने लगी हैं..।

ज्वार के #औषधीय गुणों की चर्चा करना हो तो पूरा दिन लग जाये,,,यह इतनी गुणकारी है..
1. ज्वार में बहुत सारा फाइबर होता हैं. इसलिए इसे खाने से वजन नही बढ़ता हैं.।

2. इसे खाने से किसी भी तरह का दिल का रोग नही होता हैं. यह डायबिटीज और क़ब्ज़ को दूर रखता हैं.।

3. ज्वार के कच्चे दाने पीस कर उसमे थोड़ा कत्था और चुना मिला कर लगाने से चेहरे के मुहासे दूर हो जाते हैं.।

4. यदि गर्मी की वजह से शरीर में जलन हो तो , ज्वार का आटा पानी में घोल ले, और नहाने से पहले उसका शरीर पर लेप करे.।

5. यह पेट की जलन को मिटाता हैं. भूनी ज्वार बताशो के साथ खाने से पेट की जलन और ज़्यादा प्यास लगना बंद हो जाते हैं.।

6. ज्वार बवासीर और घाव में फायदेमंद हैं.।

7. ज्वार विटामिन बी काम्प्लेक्स का अच्छा सोर्स हैं. वेजिटेरियन लोगो के लिए ज्वार का आटा प्रोटीन का एक अच्छा सोर्स हैं.।

8. रिसर्च बताते हैं की ज्वार कुछ खास किस्म के कैंसर के ख़तरे को कम कर देता हैं.।

9. ज्वार में कई तरह के मिनरल्स, प्रोटीन और विटमिन्स पाए जाते हैं. वे पूरे शरीर को पोषण प्रदान करते हैं.।

10. ज्वार के नियमित सेवन से कार्डियोवॅस्क्युलर हेल्दी रहता हैं. साथ ही कोलेस्टरॉल को भी कंट्रोल करता हैं.।

11. गर्मी में इसका सेवन अल्सर रोगियो के लिए विशेष रूप से लाभदायक होता हैं. इसका दलिया खाने से शरीर को ठंडक मिलती हैं.

12. ज्वार के दानो की राख बना कर मंजन करने से दांतो का हिलना , उनमे दर्द होना बंद हो जाता हैं और मसूड़ो की सूजन ख़त्म हो जाती हैं.

#ज्वार_महोत्सव

ज्वार के प्रति चेतना वापस आ रही है। हाल ही मध्य प्रदेश के रीवा जिले के मोजरा कोनी में श्री जगदीशसिंह यादव जी के नेतृत्व में “ज्वार महोत्सव” का आयोजन किया गया। इस आयोजन की मुख्य बात यह है कि इसमें होने वाले सहभोज में सभी पकवान ज्वार के ही थे, अलग अलग क्षेत्र के विद्वान ज्वार पर अपनी राय रखेगे वही देशी बीजो की अलख जगाने वाले Babulal Dahiya जी का ज्वार से तोलकर सम्मान भी किया गया।

ज्वार से जुड़ी कोई जानकारी हो तो आप अवश्य शेयर करे..।

नंदकिशोर प्रजापति कानवन

ह्रदय रोग में कारगर झरबेरी

बेर तो सभी जगह मिल जाते हैं… पर झरबेरी के बेर तो अब दुर्लभ से हो गए हैं…. झरबेरी को झड़बेर या जंगली बेर भी कहते हैं,,हमारे इधर इसे #बोरजाली कहते हैं…. इसके बेर बहूत ही खट्टे मीठे होते हैं… बेर की जब बहार होती है तो पत्तो से ज्यादा फल दिखते हैं…।।

आयुर्वेद के अनुसार बेर ह्वदय के लिए काफी फायदेमंद होते हैं….इन्हे खाने से बार-बार प्यास लगने की शिकायत नहीं रहती….बेर को सुखाकर और बारीक पीसकर बनाया गया सत्तू कफ व वायु दोषों का नाश करता है…..बेर को नमक और काली मिर्च के साथ खाने से अपच की समस्या दूर होती है।

झरबेरी से जुड़ी कोई जानकारी या अनुभव हो तो साझा करें..।

नंदकिशोर प्रजापति कानवन

खर पतवार नहीं बात नाशक हर निर्गुन्डी

हमारे आस पास कई औषधि पौधे बिखरे पड़े हैं ,कोई पहाड़ पर तो कोई नदियों,मैदानों पर तो कुछ फसलों में खरपतवार के रूप में,,लेकिन शायद पहचान और जानकारी न होने के कारण हम उनके गुणों से अनजान होते हैं ..ऐसा ही एक औषधि पौधा है जिसे “निर्गुन्डी ” कहते हैं…जो शरीर क़ी रोगों से रक्षा करे वह निर्गुन्डी होती है” …इसे वात से सम्बंधित बीमारियों में रामबाण औषधि माना गया है ,,छह से बारह फुट उंचा इसका पौधा,झाड़ीनुमा सूक्ष्म रोमों से ढका रहता है ,पत्तियों क़ी एक ख़ास पहचान किनारों से क़ी जा सकती है,इसके फल छोटे और गोल होते हैं…. कुछ दिनों पहले माही नदी के तट पर जाना हुआ जहाँ यह पौधा हजारो की संख्या मिला,,वहाँ आदिवासी लोग इसे नैगड़ कहते हैं… उनके अनुसार चोट लगने या सूजन होने पर इसकी पत्तियों को कूटकर बांधा जाता है…वही बच्चो के गले मे इसकी जड़ को भी बांधते हैं ताकि दांत जल्दी निकल आये…।


निर्गुन्डी को संभालू/सम्मालू, शिवारी, निसिन्दा शेफाली,गुजरात मे नेगड़ संस्कृत में इंद्राणी,नीलपुष्पा,सिन्दुवार आदि नामो से जाना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार यह कफवातशामक औषधि के रूप में जानी जाती है ,जिसे श्रेष्ठ वेदनास्थापन अर्थात दर्द को कम करने वाला माना गया है… यह घाव को विसंक्रमित करनेवाला ,भरनेवाले गुणों से युक्त होता है…


इसकी पत्तियों का काढा बनाकर कुल्ला करने मात्र से गले का दर्द जाता रहता है वही
कटे-फ़टे होठ पर केवल इसके तेल को लगाने से लाभ मिल जाता है… I
#साइटिका ओर #स्पेनडिक्स रोग में निर्गुन्डी रामबाण इलाज है..।
अनेक रोगों में ईसकी पत्तियाँ,छाल, जड़े, बीज और तेल बहुत ही लाभकारी सिद्ध होते हैं..।

निर्गुन्डी से जुड़ी कोई जानकारी हो तो अवश्य शेयर करे…।
नंदकिशोर प्रजापति कनावन