मोदी का बढ़ता सामाजिक न्याय !

कांग्रेस, कम्युनिस्टों और Scheduled Caste के तथाकथित नेताओ के उद्वेलित होने का क्या कारण हो सकता है?
लोकनीति-CSDS के अनुसार, हाल ही में गुजरात में हुए चुनावों में भाजपा ने अपने Scheduled Caste वोटशेयर में लगभग 70% की वृद्धि दर्ज की है. 2012 के चनावों में इस वर्ग के 23% वोट भाजपा को मिले, जबकि 2017 में 39% Scheduled Caste वोट भाजपा को पड़े.
आप जानते है, क्यों?
क्योकि प्रधानमंत्री मोदी जी ने सब्सिडी (लागत से कम मूल्य पे सामान बेचना, जैसे कि राशन, गैस इत्यादि) और मनरेगा की मजदूरी को बिचौलिया के द्वारा देने की जगह उस सब्सिडी और मजदूरी की रकम सीधे लाभार्थी के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करना शुरू कर दिया. इसके दो फायदे हुए.
पहला, भ्रष्टाचार में भरी कमी आयी.
लेकिन इससे भी बड़ा दूसरा लाभ यह हुआ कि लाभार्थी और उनका परिवार अपने आप को सशक्त महसूस करने लगा. अब उस गरीब महिला को दूकानदार, पटवारी, प्रधान इत्यादि के सामने अपने अधिकार (सब्सिडी) के लिए गिड़गिड़ाना नहीं पड़ेगा. इसके अलावा, वह अपने पसंद की वस्तु किसी भी दूकानदार से खरीद सकती है. इन सबसे बढ़कर, बैंक अकाउंट में धन देखकर उसे जो अनुभूति होती होगी, उसको बयान नहीं किया जा सकता.
पिछले वर्ष ऐसे लाभार्थियों – जिनके बैंक अकाउंट में मोदी सरकार ने सीधे सब्सिडी का ट्रांसफर किया – की संख्या 60 करोड़ पहुँच गयी. यानि की भारत की जनसँख्या का लगभग आधा भाग. (इन लाभार्थियों में से कई को एक से अधिक लाभ – जैसे की मनरेगा, अन्न, गैस, इत्यादि – मिल रहा होगा. अतः व्यक्तिगत लाभार्थियों की संख्या कम हो सकती है.)
उनको लाभ सीधे-सीधे “दिखाई” दे रहा है.
अब रहस्य समझ में आया कि भाजपा को Scheduled Caste के वोट क्यों मिल रहे है और क्यों अन्य पार्टिया बैचेन है?

अमित सिंघल

एक समाचार जो भारत में छपा नहीं

पिछले वर्ष 15 मई को हिंदुस्तान टाइम्स ने कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट की वेबसाइट का जानबूझकर – जानबूझकर – गलत विश्लेषण करते हुए लिखा कि भारत पत्रकारों के लिए तीसरा सबसे खतरनाक देश है, जबकि कमेटी की वार्षिक रिपोर्ट दिसंबर में जारी होती है.
इस वर्ष का डाटा कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट ने 21 दिसंबर को पब्लिश कर दिया है. फिर भी किसी भारतीय समाचारपत्र में इसकी खोज खबर नहीं ली गई. ऐसा क्यों?
क्योंकि कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट के अनुसार इस वर्ष भारत में तीन पत्रकारों की या तो हत्या हुई या एक खतरनाक मिशन पर कार्य करते हुए उनकी मृत्यु हो गई. इनमें से एक पत्रकार सुदीप दत्त भौमिक की त्रिपुरा की पुलिस ने नवंबर में हत्या की, जबकि दूसरे पत्रकार शांतनु भौमिक त्रिपुरा को पीपुल्स फ्रंट और सत्तारूढ़ गणमुक्ति परिषद पार्टी के सदस्यों के बीच झड़पों को कवर करते समय भीड़ ने मार दिया.
तीसरी पत्रकार गौरी लंकेश थी, जिनकी हत्या उनके घर के बाहर कर दी गई थी. कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट के अनुसार लंकेश, राज्य सरकार की तरफ से माओवादी विद्रोहियों को राज्य पुलिस के सामने सरेंडर कराने का प्रयास करवा रही थी. उनके भाई इंद्रजीत लंकेश के अनुसार गौरी लंकेश को माओवादी विद्रोहियों की तरफ से बहुत सारी धमकी भरी मेल आती थी और उन्होंने मांग की कि सीबीआई को यह जांच करनी चाहिए कि उनकी हत्या हिंदू उग्रवादियो ने की या माओवादी गैंग ने.
यही पर राज छुपा है. कैसे “वे” त्रिपुरा की सरकार के विरुद्ध लिख देंगे?
अगर लंकेश के बारे में ही लिखेंगे, तो मेरे जैसे लोग कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट की वेबसाइट का हवाला देकर लंकेश के भाई का बयान और त्रिपुरा में हुई दो हत्याओं की याद दिला देंगे.
फिर कहाँ मुंह छिपाएंगे?

अमित सिंघल

गरीब का आस्तित्व और अधिकार सुनिश्चित करेगा आधार

भारत में आधार कार्ड को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है। आधार को सरकारी सेवाओं से लिंक करने के प्रयास को निजी सुरक्षा के लिए खतरा माना. अगर आप सोशल और न्यूज़ मीडिया को देखे, तो अधिकतर लोग – लगभग सारे के सारे वामपंथी और एक्टिविस्ट – आधार के विरुद्ध है. वे अपने तर्कों के लिए प्राइवेसी और गरीबो को आधार से सम्बंधित तकनीकी परेशानी का हवाला देते है.
और इसी बिंदु पे वे अभिजात वर्ग की सत्ता पे पकड़ वाली थ्योरी को सत्य कर देते है कि अभिजात वर्ग ने जनता को बरगला कर स्वतंत्रता के बाद सत्ता पे कब्ज़ा किया हुआ था.
कैसे?
इस अभिजात वर्ग के सौ प्रतिशत सदस्य यूरोप और अमेरिका जाते है. इन सभी देशो के वीसा के लिए बायोमेट्रिक इनफार्मेशन ली जाती है. और तो और, कनाडा के वीसा के लिए आपको अपने भाई-बहनो का भी विवरण देना पड़ता है. वहां जाने के लिए इस अभिजात वर्ग को प्राइवेसी का खतरा दिखाई नहीं देता, लेकिन भारत में यह एक इशू बन जाता है.
यह दोगलापन नहीं तो और क्या है?
वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र में सभी देशो ने 17 सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) को अपनाया था, जिनके अमल से विश्व में गरीबी मिटाई जा सकती है, सभी को शिक्षित किया जा सकता है और स्त्री-पुरुष समानता प्राप्त किया जा सकेगा. इनमे से एक लक्ष्य शांतिपूर्ण और समरस समाज की स्थापना के बारे में है, जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र कहता है कि सभी व्यक्तियों को कानूनी पहचान प्रदान करना होगा.
क्योकि बिना क़ानूनी पहचान के रामलाल को यह सिद्ध करना होगा कि वही रामलाल है. उस पहचान पत्र के लिए किसी सरपंच, बाबू या बैंक के समक्ष दीनभाव से गिड़गिड़ाना होगा.
आधार कार्ड ने रामलाल को यह शक्ति दी है, यह आत्मविश्वास दिया है कि उसका आस्तित्व सुरक्षित है, उसके अधिकार सुनिश्चित है, उसकी गरिमा अक्षुण्ण है.
अगर विश्वास नहीं है तो अपने गांव में किसी ताई से आधार कार्ड वापिस करने को बोलिये.
है  हिम्मत आपमें

अमित सिंघल

Por favor, señor, le pido que, por favor, deje este lugar.

सर, मैं आप से निवेदन करता हु, यहाँ से चले जाइये.”
“Por favor, señor, le pido que, por favor, deje este lugar.”
यद्यपि मुझे स्पेनिश भाषा नहीं आती, फिर भी मैं अच्छी तरह से समझ सकता था कि वेटर किसी को रेस्तरां छोड़ने के लिए कह रहा था. क्योकि मुझे फ्रेंच आती है और दोनों भाषाए काफी मिलती जुलती है.
“सर आगे बढ़ें, मुझ पर एहसान करे … “, “जाइये सर”, वेटर गिड़गिड़ाया.
मैं सपरिवार गोविंदा में था, एक शुद्ध शाकाहारी रेस्तरां अगुआस कालिएन्ट्स में. अगुआस कालिएन्ट्स एक छोटा सा धूल भरा गांव है, पेरू की इंका सभ्यता का खोया हुआ प्रसिद्ध शहर माछु पिच्छू के बेस में बसा हुआ. पेरू भारत से कुछ 17,000 किलोमीटर दूर लैटिन अमेरिका का देश है.
गोविंदा रेस्तरां हरे कृष्ण – भगवान कृष्ण के भक्तों द्वारा – चलाया जाता है।
हालांकि हम उत्सुक थे, पर शिष्टाचार के कारण उस “व्यक्ति” की तरफ, जिसे वेटर जाने को कह रहा था – देखना नहीं चाहते थे.
फिर भी, जिज्ञासा हावी हो गयी और हमने उस दिशा में तिरछी आँखों से एक निगाह फेंक दी.
आखिर में, वह व्यक्ति बहुत ही अनिच्छा से अपनी जगह से उठा. अपनी पूंछ हिलाते हुए वह बाहर निकल गया.
वह एक कुत्ता था.
वेटर ने कुत्ते को धन्यवाद दिया. फिर, वह हमारा आर्डर लेना आया.
पेरू की, इसके शहर कुस्को, sacred valley और इसमें स्थित माछु पिच्छू की अविश्वसनीय सुंदरता की कई बेहतरीन यादें हैं.
लेकिन, यह घटना हमेशा हमारी चेतना में बसी हुई है और हमारे चेहरे पर एक भीनी सी मुस्कान ले आती है.

अमित सिंघल

कंडा पानी को बनाये टॉनिक

अभी गेहूँ का सीज़न चल रहा है तो खाद न ख़रीद पाने की भारी समस्या से जूझ रहे किसान इस विकल्प को अपना सकते हैं जिससे उनका पैसा भी बचेगा और उत्पादन में भी कोई कमी नहीं मिलेगी।

आपको ज़्यादा मेहनत नहीं करनी है….गोबर से बनने वाले #कंडे या #चिपरी या #गोहरी या #गोइठा जो भी कहते हों….आपको सात कंडे लेने है और ३०-३५ लीटर पानी लेना है किसी भी प्लास्टिक के ड्रम में।
एक के ऊपर एक सात कंडे रखकर किसी ईंट या पत्थर से दबा दीजिए और पानी डालकर चार दिन तक छोड़ दीजिए।
पानी हल्का लाल रंग का हो जाएगा बस आपका टॉनिक तैयार है।।

ज़रूरत हो तो छान लीजिए अन्यथा स्प्रेअर में भरकर छिड़काव कर दीजिए यह अपको पूरी फ़सल में तीन बार डालना है दो बार फूल आने से पहले और एक बार फूल आने के सात दिन बाद।।

एक बार कोशिश करके देखिए इसमें कोई बहुत अधिक मेहनत की ज़रूरत भी नहीं है और असर ज़ोरदार है…फ़सल एकदम करिया भूत हो जाती है……तथा उत्पादन ज़बर्दस्त है…और साथ में दाने भी अलग दिखेंगे।।

यह लगभग एक एकड़ के लिए पर्याप्त है बाक़ी आप अपने खेत की उर्वरा के हिसाब से मात्रा कम या थोड़ा अधिक कर सकते हैं परंतु ज़्यादा नहीं।।

एक छिड़काव करके इसका रिज़ल्ट देख कर लिख रहा हूँ।
आप लोग भी कोशिश कीजिए और किसानो को आत्महत्या करने से बचाइए।।

किसान हैं तो देश रहेगा अन्यथा कुछ नहीं बचने वाला।
समस्या भीषण है और ध्यान देने वाला कोई नहीं।
यही सब अमेजन वाले बेच रहे हैं और हम हीनभावना में मर रहे हैं।।

खेती पर लिखी जाने वाली सिरीज़ बीच में रोकनी पड़ी थी कुछ वजह से……लेकिन आज अजेष्ठ त्रिपाठी भाई की वजह से दुबारा शुरु कर रहा हूँ।
अब आपको निरंतर कुछ न कुछ इस विषय में मिलेगा जितना मुझे जानकारी है…सब लिखूँगा।।।

जितना हो सके इस जानकारी को फैलाने में मदद कीजिए।।।।

शैलेंद्र सिंह
आजमगढ़